OSHO - 3:40 AM: इस समय जागना आपकी किस्मत बदल देगा | The Secret of Brahma Muhurta | Osho Vani #osho
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आजकल जिसे हम दुर्भाग्य और असफलता कहते हैं, वह केवल तालमेल की कमी और छोटी सी चूक है। कुछ लोग बहुत कम मेहनत करके भी सफल हो जाते हैं, क्योंकि वे सही समय पर सही जगह होते हैं। यह भाग्य नहीं, बल्कि समय का खेल है।
ब्रह्म मुहूर्त, या सुबह 3:40 का समय, सिर्फ एक धार्मिक अवधारणा नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक घटना है। इस समय पृथ्वी का वातावरण बदलता है, जिसमें ओजोन और नवजात ऑक्सीजन की मात्रा 40% तक बढ़ जाती है। इस वायु में सांस लेने से शरीर शुद्ध होता है और ऊर्जावान बनता है।
ब्रह्म मुहूर्त में जागने से शरीर को ताजी और ऊर्जावान ऑक्सीजन मिलती है, जो शरीर के विषैले तत्वों को जला देती है। इस समय पीनियल ग्रंथि (तीसरी आंख) भी सक्रिय हो जाती है, जो मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे रसायन छोड़ती है। ये रसायन व्यक्ति को आनंद और मानसिक स्पष्टता प्रदान करते हैं।
सुबह 3:40 बजे ब्रह्मांड का प्रसारण सबसे साफ होता है, जिससे हमारा दिमाग ब्रह्मांडीय मन से जुड़ जाता है। इस समय हमें ऐसे विचार, समाधान और आइडिया मिलते हैं, जो दिन के शोर में संभव नहीं होते। यह समय हमारी समस्याओं को छोटा और हमें बड़ा महसूस कराता है।
ब्रह्म मुहूर्त, जब दुनिया शांत होती है और विचारों का प्रदूषण शून्य होता है, तब हमारी प्रार्थनाएं और विचार सीधे अस्तित्व तक पहुंचते हैं। यह समय आकर्षण के नियम को सक्रिय करता है, जहाँ हम जो महसूस करते हैं, उसे अस्तित्व कई गुना बढ़ाकर वापस लौटाता है।
किसी भी नई आदत को बनाने में 21 दिन लगते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में जागने का अभ्यास शुरू में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन 21 दिनों तक लगातार ऐसा करने से शरीर और मन इस आदत को अपना लेते हैं। इसके बाद, बिना अलार्म के भी हम ठीक 3:40 पर जाग जाते हैं और एक अद्भुत ताजगी और सकारात्मकता महसूस करते हैं।
एक युवक, जो कर्ज और परेशानियों से घिरा था, ने 21 दिनों तक ब्रह्म मुहूर्त में जाग कर ध्यान करने का प्रयोग किया। शुरू में उसे मुश्किल हुई, लेकिन तीसरे हफ्ते तक उसे अपने प्रश्नों के उत्तर मिल गए, एक नया विचार आया और उसका डर खत्म हो गया। उसकी परिस्थितियां वही थीं, लेकिन वह खुद बदल गया।
ब्रह्म मुहूर्त जागने का सही समय है, जब ब्रह्मांड की खिड़की खुलती है। यह नींद कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि गहरे विश्राम और ऊर्जावान होने के बारे में है। हम अपनी घड़ी को कुदरत की घड़ी से मिलाएं और इस अवसर को बेहोशी में न गवाएँ। यह जीवन एक अवसर है, और ब्रह्म मुहूर्त में जागना उस अवसर को जीने का पहला कदम है।