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Summary

यह वीडियो आनंद यादव की आत्मकथा 'जूझ' पर आधारित है, जिसमें बताया गया है कि कैसे उन्होंने संघर्षों का सामना करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और साहित्य जगत में एक बड़ा मुकाम हासिल किया।

Highlights

जूझ कहानी का परिचय00:00:00

यह कहानी आनंद यादव की आत्मकथा का एक हिस्सा है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के संघर्षों और पढ़ाई के प्रति अपनी लगन को दर्शाया है। 'जूझ' का अर्थ है संघर्ष करना। यह मराठी उपन्यास 'झोबी' से ली गई है और इसका हिंदी अनुवाद केशव प्रथम वीर ने किया है।

स्कूल जाने का संघर्ष00:01:10

आनंद जब पांचवीं कक्षा में थे, तो उनके पिता (रत्नप्पा, जिन्हें वे दादा कहते थे) ने उनकी स्कूल जाना बंद करवा दिया, ताकि वे घर और खेत के कामों में हाथ बटा सकें। आनंद पढ़ना चाहते थे और अपनी माँ से इस बारे में बात की, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर वे नहीं पढ़े तो हमेशा गरीब ही रहेंगे।

मुखिया का हस्तक्षेप और पढ़ाई की शर्तें00:02:21

आनंद और उनकी माँ गाँव के मुखिया दत्ता जी राव से मिले, जिन्होंने उनके पिता को बुलाकर फटकारा और आनंद को वापस स्कूल भेजने के लिए राजी किया। पिता ने कुछ शर्तें रखीं, जैसे सुबह जल्दी उठकर काम करना, खेतों में पानी लगाना, जानवर चराना और अधिक काम होने पर स्कूल न जाना।

स्कूल का अनुभव और वसंत पाटिल से दोस्ती00:04:18

स्कूल में आनंद का पहला दिन अच्छा नहीं था क्योंकि वे अपने सहपाठियों से बड़े थे। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी कक्षा के एक होनहार छात्र वसंत पाटिल से दोस्ती कर ली। वे दोनों मिलकर पढ़ाई करने लगे और शिक्षक भी उन्हें दूसरे बच्चों की कॉपी जांचने के लिए देने लगे।

न. सौंदगेकर सर का प्रभाव और कविता लेखन00:05:16

उनके मराठी शिक्षक, न. सौंदगेकर सर, का पढ़ाने का तरीका अद्भुत था। वे कविताओं को गाकर और अभिनय करके पढ़ाते थे। उन्हें देखकर आनंद को भी कविताएं लिखने में रुचि जगी। वे अपने शिक्षक की नकल करते हुए खेतों में काम करते समय कविताओं का अभ्यास करते थे।

महान कथाकार और उपन्यासकार बनना00:06:46

जब सौंदगेकर सर ने मालती की बेल पर एक सुंदर कविता लिखी, तो आनंद को लगा कि अगर एक बेल पर कविता लिखी जा सकती है, तो वे खेत, आकाश और पेड़-पौधों पर क्यों नहीं लिख सकते। उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया, और उनके शिक्षक ने उन्हें रस, छंद और अलंकार की बारीकियां सिखाकर उनकी मदद की। इस तरह, अपनी लगन और मेहनत से, आनंद एक महान कथाकार और उपन्यासकार बन गए।

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